Aadarsh Rathore

"हरा#जादी, कुत्ती, साली, भै@ की लो*...!!! कहां से %#$ कर आ रही है...?"

बीती रात गर्ल्ज पीजी वाले लेन के अंधेरे कोने में एक लड़का अपने साथ खड़ी लड़की पर चीख रहा था. अचानक गालियों की बौछार तेज़ होने लगी. लड़की बेहद लाचार और बेबस होकर सिर झुकाए खड़ी थी. मैं अपने दोस्त के साथ पास की ही दुकान पर खड़ा था. इससे पहले की माजरा समझ में आता, लड़के ने पूरी ताकत से लड़की के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया.

ये देख मेरा दोस्त आग-बबूला हो उठा. बड़े ही तेज कदमों से वो उस अंधेरे कोने की तरफ बढ़ चला जहां ये सीन चल रहा था. मैं भी उसके पीछे हो लिया. लेकिन जैसे ही मेरा दोस्त उनके करीब पहुंचा वो ठिठक गया. 1-2 सेंकेंड बाद मुझसे बोला कि चलो वापस.

मंद रोशनी में मैंने देखा कि लड़की कोई और नहीं बल्कि मेरे दोस्त की एक्स गर्लफ्रेंड थी. जब वो दोनों शिमला में थे तो 3 साल रिलेशनशिप में थे. दिल्ली आने के बाद लड़की ने ऑफिस जॉइन  किया और तब से उसके व्यवहार में परिवर्तन आने लगा था. लड़की पारिवारिक वजहों का हवाला देकर अलग होने की जिद करने लगी थी.

मेरे दोस्त ने कभी भी उससे ऊंची आवाज में बात नहीं की थी. उस पर जान छिड़कता था. जितना समर्पण और प्रेम भाव मैंने उसके अंदर देखा था , वैसा आज तक कहीं और देखने को नहीं मिला. लेकिन लड़की उससे उतनी ही बदतमीजी और दुत्कार भरे रवैये से बात करती थी. वो उसकी हर बात मानता, उसकी हर हरकत को सहता. अकेले में रो लेता लेकिन शिकायत न करता.

एक दिन दोस्त को पता चला कि उसकी गर्लफ्रेंड का ऑफिस में ही किसी से अफेयर चल रहा है. वो रोया, गिड़गिड़ाया लेकिन लड़की ने उल्टे उसे न जाने क्या-क्या कहा. इसी दौर में जब वो उसके जन्मदिन पर फूल लेकर पीजी के बाहर गया था (संयोग से मैं भी साथ गया था और दूर से देख रहा था.) तो उस लड़की ने सभी लड़कियों के सामने फूलों को न सिर्फ सड़क पर फेंक दिया बल्कि अनाप-शनाप कह कर बुरी तरह बेइज्जती की. इसके बाद वो कई दिन तक डिप्रेशन में रहा था.

खैर, आज 1 साल बाद हालात बदल गए थे. उसी लड़की को उसका बॉयफ्रेंड सरेआम जलील कर रहा था, गालियां दे रहा था, मारपीट कर रहा था. मैं हैरान होकर सोच रहा था कि ये भी कैसी विडंबना है कि एक तरफ जहां एक लड़का उसे जी-जान से चाहता था, उसे बेपनाह प्यार करता था, उसका ख्याल रखता था, इज्जत से बात करता था, देखने में हैंडसम था, संस्कारी था.... उसे तो उस लड़की ने छोड़ दिया. लेकिन जिस लड़के के लिए  उसने उसे छोड़ा... आज वही उसे गालियां दे रहा है, बेइज्जत कर रहा है, थप्पड़ मार रहा है.. लेकिन वो चुपचाप सह रही है!!!

ये कैसी फितरत है कि जो आपको प्यार करता है, सम्मान देता है.. उसे तो आप दुत्कारते हैं लेकिन जो आपको दुत्कारता है, आपको भाव नहीं देता... उसे प्यार करते हैं...?

सदियों से भारतीय समाज में पुरुष महिलाओं को पांव की जूती समझकर उनका दमन करते आ रहे हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि कुछ महिलाओं की मानसिकता ऐसी ही हो गई हो. जाने ऐसी कौन सी मजबूरी है कि उन्हें प्यार, सम्मान और समानता के बजाए दुत्कार, अपमान और प्रताड़ना ज्यादा पसंद है!!!
Aadarsh Rathore

अब तक आप जान चुके हैं कि पेइंग गेस्ट में किस तरह की घटनाएं हो रही थीं. साल 2011 के मार्च महीने की ही बात है. पुरानी पोस्ट पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें. मेरे पीजी के बगल में ही एक मंदिर है, जिसके बारे में मैं पहले ही बता चुका हूं. वहां पर एक पंडित जी भी हैं जो मंदिर के साथ ही ऊपर की तरफ बने कमरे में अपने परिवार के साथ रहते हैं. एक दिन सुबह मैं मंदिर की तरफ गया तो देखा पंडित जी पीजी में रहने वाले एक लड़के को कुछ बता रहे थे. पंडित जी बता रहे थे कि दिल्ली में अपराधी इस कदर बेखौफ हो चुके हैं बीती रात सामने वाले पार्क में एक लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे थे. मेरी उत्सुकता जगी तो मैं भी पंडित जी के पास खड़ा होकर सुनने लग गया. बीती रात कुछ इस तरह का वाकया हुआ था.

पंडित जी को रात 2 से 2.30 बजे के करीब पंडित जी को आवाज सुनाई कि कोई मंदिर का दरवाजा खटखटा रहा है. पंडित जी उठे और उन्होंने ऊपर से झांककर देखा. नीचे एक लड़की खड़ी थी जो पागलों की तरह मंदिर का दरवाजा पीट रही थी. उसके चेहरे पर डर के भाव थे और बार-बार वो पार्क की तरफ देख रही थी. वो इतनी बदहवास ही थी कि उसे ये भी ख्याल नहीं रहा था कि दरवाजे पर ताला लगा है. हैरान-परेशान पंडित जी ने ऊपर से पूछा कि क्या हुआ, कौन हो... इस पर लड़की ने ऊपर देखकर कहा कि प्लीज, मुझे बचा लो... कुछ लोग मेरे पीछे पड़े हैं.. प्लीज़... पंडित जी ने पार्क की तरफ देखा तो अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं दिया. फिर भी उन्होंने यूं ही डंडा उठाया और पार्क की दिशा में चिल्लाते हुए कहने लगे कि भाग जाओ वरना पुलिस को बुला दूंगा. इतने में पंडित जी की धर्मपत्नी भी जग गई थीं. दोनों नीचे उतरे और लड़की के पास गए. उन्होंने देखा कि लड़की का दम चढ़ा हुआ है और वो रोआंसी सी है. पंडिताइन ने पास ही रखे घड़े से पानी का गिलास लड़की को पीने को दिया. उसे इतनी प्यास लगी थी कि एक-एक गिलास करके पूरा घड़ा पी गई.

पंडित जी ने हैरानी भरी हालत में उस लड़की से पूछा कि कौन हो तुम? और इतनी रात को यहां क्या कर रही थी? ये लड़के कौन थे? पंडित जी के सवालों पर लड़की खामोश रही और रोने लगी. जब पंडिताइन ने सहारा दिया और हिम्मत बढ़ाते हुए उससे पूछा तो लड़की ने ये कहानी बताई-

"मैं यही संत नगर में रहती हूं. एक छोटे से शहर (नाम याद नहीं है) से यहां पढ़ने आई थी. गरीब परिवार से हूं तो जैसे-तैसे परिवारवालों ने पढ़ाया ताकि मैं यहां कुछ कमाकर परिवार की मदद कर सकूं. नौकरी के लिए कई दिनों से मैं दर-दर भटक रही हूं लेकिन नौकरी नहीं मिली. यहां मेरी जान-पहचान का एक लड़का है जिसने मुझे अच्छी नौकरी दिलाने का वादा किया. इंटरव्यू के नाम पर आज मुझे उसने एक जगह बुलाया और वहां पर बहुत सारे लोग थे. वहां पर मुझे कुछ ठीक नहीं लगा इसलिए मैंने तबीयत खराब हो जाने का बहाना करके घर जाने की जिद की. इस पर वो सभी लोग एक गाड़ी में बिठाकर मुझे घर छोड़ने के लिए निकले. मैं समझ गई थी कि इनके इरादे ठीक नहीं है. कार में बैठी ही थी कि मेरे साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी. लेकिन मैंने गाड़ी की खिड़की का शीशा बंद नहीं होने दिया इसलिए उनमें से किसी की हिम्मत नहीं पड़ी. जैसे ही गाड़ी संत नगर पहुंची तो जो मेरी जान-पहचान का लड़का था उसने हाथ-पकड़ लिया और कहने लगा कि प्लीज आज हमारे साथ चल लो. लेकिन मैं किसी तरह से गाड़ी से भाग निकली और भागते हुए इस गली में आ गई (आपको बता दूं कि हमारे पीजी वाली गली मेन रोड और पार्क की तरफ से पहली गली है). मैंने जब मंदिर का दरवाजा खटखटाना शुरू किया तो वो लोग पार्क में ही रुक गए. वो इधर उजाले में नहीं आने देना चाहते थे. "

इस पर पंडित जी ने कहा कि तुमने पुलिस को फोन क्यों नहीं किया ? इस पर लड़की ने कहा कैसे करूं पुलिस को फोन? मेरा फोन तो हड़बड़ी में गाड़ी में ही रह गया. इस पर लड़की ने फिर से रोना शुरू कर दिया. पंडित जी ने अपनी पत्नी से कहा कि आप चाय बनाकर लाएं. पंडिताइन जी चाय बनाने के लिए ऊपर चली गईं. पंडित जी ने भी लड़की की हिम्मत बढ़ाई और कहा कि कोई बात नहीं, अब तुम यहां सुरक्षित हो. जब काफी देर हो जाने पर भी पंडिताइन चाय लेकर नहीं आईं तो पंडित जी खुद सीढ़ियां चढ़कर देखने चले गए कि क्या बात हो गई. पंडित जी ने 7-8 सीढ़ियां चढ़कर छत पर पहुंचते ही पार्क की तरफ देखा कि कहीं पार्क में वो बदमाश तो नहीं हैं जिनका जिक्र लड़की ने किया है. जब वो संतुष्ट हो गए कि वहां पर कोई नहीं तो उन्होंने यूं ही छत से झांककर एक नजर लड़की की तरफ भी दौड़ाई. वो हैरान रह गए कि जिस जगह पर लड़की बैठी थी, वो खाली है. वो तुरंत दौड़ते हुए नीचे उतरे और देखा कि लड़की का कोई अता-पता नहीं हैं.

पार्क और गली के बीच में कई फीट की रेलिंग लगी थी जिसे वो लड़की पार नहीं कर सकती थी. अगर उसे वहां से जाना होता तो उसी रास्ते से जा सकती थी जिस रास्ते से वो आई थी. अगर ऐसा होता तो 100 मीटर लंबी सड़क को 5-10 सेकेंड में तो "बोल्ट " जैसा रेसर भी पार नहीं कर सकता. पंडित जी ने सोचा कि अजीब लड़की है. जो बिना बताए ही चली गई. पंडित जी भी अपेन कमरे में गए और सो गए.

पंडित जी तो इसे सामान्य घटना मान रहे थे. लेकिन हमारे पेइंग गेस्ट में जैसे ही इस बात की खबर फैली, इसे पीजी में हो रही रहस्यमयी घटनाओं से जोड़ दिया गया. कहीं वो उसी लड़की की आत्मा तो नहीं थी जिसने हमारे पीजी में कथित तौर पर आत्महत्या की थी? कहीं इसी तरह की घटना (जो पंडित जी को मिली लड़की के साथ हुई थी) से परेशान होकर उस लड़की ने आत्महत्या तो नहीं की थी जिसने हमारी पीजी में जान दी थी? सभी को लग रहा था कि वो कोई आत्मा ही थी क्योंकि इतनी रात को कोई लड़की अगर ऐसे हालात में फंसती तो वो बजाए बस्ती के किनारे की तरफ जाने के वो बीच बस्ती की ओर जाती जहां उसे ज्यादा लोग सुन पाते. और अगर वाकई उसके पीछे गुंडे थे तो वो थे कहां? यही नहीं, उसने हमारे पीजी के साथ एक कोने में बने मंदिर को ही क्यों चुना? 5 सेकेंड के अंदर वो लड़की कहां गायब हो गई? कुछ लोगों का कहना है कि क्योंकि वो अच्छा आत्मा थी और खुद पीड़ित थी इसलिए वो मंदिर के पास तक आ गई.

ये कई सारे सवाल हैं जिनका जवाब कोई नहीं दे पाया. लेकिन इस घटना के बाद ये बात पुख्ता हो चली थी कि हो न हो, पीजी में आत्महत्या वाली बात में दम है. इस घटना के बाद एक और ऐसी ही घटना हुई जिससे ये आशंका गहरा गई कि आत्महत्या वाली बात अफवाह नहीं, बल्कि सच्चाई है...
अगली पोस्ट में आपको बताऊंगा कि कैसे मेरे कमरे में आया नया रूममेट भी बना अजीब घटना का गवाह और कैसे एक और एक घटना ने पीजी में रहने वाले शरारती लड़कों की हवा गुम कर दी... कीजिए इंतजार अगली पोस्ट का...

(तस्वीर सिर्फ डेमो के लिए है)
Aadarsh Rathore
मेरे पीजी में होने वाली रहस्यमयी घटनाओं के बारे में तो आप पहले ही पढ़ चुके हैं. अगर नहीं पढ़ा तो यहां पर क्लिक करके पढ़ लीजिए. अब अगली घटना के बारे में आपको बताता हूं.

ये घटना मार्च, 2011 की है जब सर्दियां खत्म हो रही थीं. जिस बड़े हॉल नुमा कमरे में मैं रहता हूं, वहां मेरे साथ दो लोग और रहते थे. मेरे रूममेट्स- एक अभिषेक और दूसरा राजेश. मेरा बिस्तर कमरे के एकदम बीच में है और दोनों रूममेट्स के बिस्तर अगल-बगल लगे हैं.  एक दिन रात को मैं सो रहा था कि अचानक किसी के चीखने की आवाज सुनाई दी. मेरी नींद खुली तो कमरे में एक हलचल सी दिखाई दी और हाहाकार सा मचा हुआ था. अंधेरे में कुछ नहीं दिख रहा था. कुछ सेंकेंड्स बीतने के बाद अहसास हुआ कि अभिषेक चिल्ला रहा है. मैं उठकर बिस्तर में बैठा और हैरान होकर हालात को समझने की कोशिश कर रहा था. तभी दूसरी तरफ से राजेश ने चीखना शुरू कर दिया. वो जोर-जोर से चिल्ला रहा था- चौथा कौन? चौथा कौन?

असमंजस वाली हालत में फंसा मैं कभी बाएं देखूं तो कभी दाएं. लेकिन अंधेरे में कुछ नहीं दिख रहा था. नींद से एकदम जगने के कारण समझ ही नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है और मुझे क्या करना चाहिए. एकदम हक्का-बक्का रह गया था मैं. कम से कम 10 सेकेंड बाद लाइट जली तो देखा कि मेरे दाईं तरफ अभिषेक अपने बिस्तर पर चढ़कर कोने पर खड़ा हुआ है और घबराया हुआ है. और जब बाईं तरफ देखा तो राजेश पसीने से लथपथ और बेहद घबराया हुआ गहरी सांसें भर रहा है.

आपको साफ कर दूं कि इस घटना में साजिश जैसी कोई बात नहीं थी. ऐसा नहीं था कि अभिषेक और राजेश दोनों ने मिलकर मुझे डराने की कोशिश की हो क्योंकि उन दोनों के बीच बातचीत ही नहीं होती थी.

उन दोनों के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं. मैंने पूछा कि क्या हुआ? लेकिन उन दोनों में से कोई भी बोलने की स्थिती में नहीं लग रहा था. एक मिनट तक कमरे में चुप्पी छाई रही और हर कोई खामोश होकर एक-दूसरे को देख रहा था. घड़ी रात के 2 बजा रही थी. इतनी देर तक आसपास के कमरों में रहने वाले लड़के भी शोर-शराबा सुनकर मेरे कमरे में आ गए थे. उन्होंने भी पूछा कि क्या हुआ?

राजेश थूक गटकता हुआ बोला कि कमरे में कोई चौथा था... हमारे अलावा भी कोई था जो अभी-अभी भागा है. उसकी बात सुनकर हम हैरान थे. आखिर कमरे में हम तीन के अलावा चौथा कौन हो सकता है और वो इतनी रात को क्या कर रहा था. फिर अभिषेक से पूछा गया कि तुम क्यों चिल्ला रहे थे. अभिषेक ने कहा कि मुझे लगा कि कोई मेरे साथ सोया हुआ है. हम सभी कहने लगे कि तुम लोगों को वहम हुआ है. लेकिन अंदर से हर कोई डरा हुआ था. लेकिन अभिषेक का कहना था कि नींद में उसे महसूस हुआ कि कोई उसके साथ सोया हुआ है. फिर उसने आंखें खोलकर महसूस किया कि उसकी टांग के पास कुछ है जो रेंग रहा है. उसने छूकर देखा तो कुछ रोएंदार सी चीज़ महसूस हुई. इस पर उसने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए उस चीज़ को एक तरफ झटका और चिल्लाने लगा था.

वहीं राजेश का कहना था कि जैसे ही उसने अभिषेक की चीख सुनी थी तो उसकी नींद खुल गई थी. जैसे की उसने आंखें खोली थी तो उसने किसी को कमरे से भागते हुए देखा था. हालांकि कमरे में बत्ती बुझी हुई थी लेकिन चूंकि राजेश का बिस्तर दरवाजे के पास था, इसलिए अगर कोई वहां से गुजरता तो उसे पता चल ही जाता.

समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्या हुआ. वाकई कोई कमरे में था या नहीं. अगर था तो कौन और अगर नहीं था तो उन दोनों को एकसाथ भ्रम कैसे हो सकता था. मैं अपनी तरफ से कयास लगाता रहा कि हो सकता है कि अभिषेक के बगल में बिल्ली सो गई हो. क्योंकि बिल्लियां अक्सर सर्दियों में गर्म जगह ढूंढती हैं. ये भी हो सकता है शायद बिल्ली से घबराए अभिषेक ने जो शोर मचाया, उससे राजेश अचानक डर गया हो. शायद उसे हड़बड़ी में और नींद से जगने की हालत में  लगा हो कि कमरे में कोई चौथा इंसान भी है. लेकिन हकीकत क्या है ये तो ऊपर वाला ही जाने.

पहली भी इतनी सारी अजीब घटनाएं घट चुकी थीं कि इस बार भी ये किसी भूत की ही करामात लग रही थी. इन्ही सर्दियों में एक और रहस्यमयी घटना हुई जिसके बारे में आपको अगली पोस्ट में बताउंगा. एक ऐसी घटना जिसके बारे में आप पढ़कर आप भी हैरान हो जाएंगे. एक रहस्यमयी लड़की की घटना जो जाने कहां से आई और कहां चली गई. क्या वो लड़की भटकती हुई आत्मा थी?
इन सवालों का जवाब जानने की कोशिश कीजिए अगली पोस्ट में....
Aadarsh Rathore
मुस्कुराकर वो खुद को खुश जताते रहे
मगर अफसोस! आंसू सब सच बताते रहे...